मजदूर दिवस पर मजदूरों का सम्मान होना चाहिए,
उनके कार्य का एहसान होना चाहिए,
ये जो विकास की ऊंची-ऊंची उड़ानें हैं
वो सब मजदूरों के खून पसीने पर टिकी हैं,
हमें उनके दर्द का
एहसास होना चाहिए,…
पर क्या सच में उन्हें
उनकी मेहनत का
प्रतिदान मिलता है?
सरकार के नियम
उनकी पेट की आग नहीं बुझाते,
घर का चूल्हा जलाने
वे जीवन भी दांव पर हैं लगाते,
वो भी इंसान हैं
मन में ये भाव जागना चाहिए,…
दुर्घटना की स्थिति में
बेरोज़गारी उनका सबसे बड़ा डर है,
सुरक्षित भविष्य की नींव
उनको तनावमुक्त कर देगी,
उनके बच्चे पढ़ लिख पायें, भूखे पेट सोना ना पड़े,
ऐसा इंतजाम होना चाहिए
-नमिता दुबे मिशा
