संवेदनशीलता मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है। यही गुण हमें दूसरों के सुख-दुःख को समझने और उनके प्रति सहानुभूति रखने की प्रेरणा देता है। किंतु वर्तमान समय में समाज में संवेदनहीनता बढ़ती दिखाई दे रही है। दुर्घटना हो, किसी जरूरतमंद की सहायता का अवसर हो या पारिवारिक संबंधों की बात हो, लोगों में पहले जैसी आत्मीयता और अपनापन कम होता जा रहा है।
कारण
अत्यधिक व्यस्त जीवनशैली – आज व्यक्ति अपने काम और व्यक्तिगत लक्ष्यों में इतना व्यस्त है कि उसे दूसरों की समस्याओं पर ध्यान देने का समय नहीं मिलता।
तकनीक पर बढ़ती निर्भरता – मोबाइल और सोशल मीडिया ने लोगों को आभासी रूप से तो जोड़ा है, परंतु भावनात्मक रूप से दूर कर दिया है।
स्वार्थ और प्रतिस्पर्धा की भावना – सफलता की अंधी दौड़ में लोग अपने हितों को सर्वोपरि मानने लगे हैं।
पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों की कमी– संयुक्त परिवारों के विघटन तथा सामाजिक मेल-जोल में कमी से सहानुभूति और सहयोग की भावना कमजोर हुई है।
निरंतर नकारात्मक समाचारों का प्रभाव – हिंसा और दुःखद घटनाओं को बार-बार देखने से लोगों की संवेदनाएँ धीरे-धीरे मंद पड़ने लगती हैं। इसका एक पहलू यह भी है, कि आज कल नर हो या मादा नाटक करके खुद को सच्चा और दूसरों को झूठा साबित करने के लिए ,रचे गए नाटक की खबरें सुनकर ,सच्ची घटनाओं
पर विश्वास करना मुश्किल हो जाता हैं।
समाधान
नैतिक और मानवीय शिक्षा को बढ़ावा देना – बच्चों को बचपन से ही करुणा, सहानुभूति और सहयोग के संस्कार दिए जाएँ।
परिवार में संवाद बढ़ाना – परिवार के सदस्यों के बीच आत्मीय बातचीत और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना विकसित की जाए।
सामाजिक सहभागिता – समाजसेवा, सामुदायिक कार्यक्रमों और जरूरतमंदों की सहायता में लोगों की भागीदारी बढ़ाई जाए।
तकनीक का संतुलित उपयोग – वास्तविक रिश्तों और मानवीय संपर्कों को प्राथमिकता दी जाए।
स्वयं में संवेदनशीलता विकसित करना – दूसरों की परिस्थितियों को समझने और उनकी सहायता करने का प्रयास किया जाए।
निष्कर्ष
संवेदनहीनता किसी भी समाज के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे मानवीय रिश्तों की गर्माहट समाप्त होने लगती है। यदि हम अपने भीतर करुणा, सहानुभूति और सहयोग की भावना को पुनः जागृत करें, तो एक अधिक मानवीय, सशक्त और सुखद समाज का निर्माण संभव है। आखिर समाज की पहचान केवल उसकी भौतिक प्रगति से नहीं, बल्कि उसके लोगों की संवेदनशीलता से होती है।
-सोनम लड़ीवाला
जयपुर
