समय का अभाव या प्राथमिकताओं का संकट?

आज के समय में कोई परिवार को समय न दे पाने की बात करता है, कोई स्वास्थ्य की अनदेखी का कारण समय की कमी बताता है, तो कोई अपने सपनों और शौकों को भी इसी बहाने टाल देता है। परंतु यदि वास्तव में सोचकर देखा जाए, तो प्रश्न यह है कि यह समय का अभाव है या प्राथमिकताओं का सही चयन न कर पाना।

प्रकृति ने सभी को समान रूप से चौबीस घंटे दिए हैं। न किसी को अधिक और न कम। फिर भी कुछ लोग इन्हीं चौबीस घंटों में अपने परिवार, काम, स्वास्थ्य, समाज और स्वयं के लिए संतुलित समय निकाल लेते हैं, जबकि कुछ लोग दिनभर व्यस्त रहने के बाद भी संतुष्टि का अनुभव नहीं कर पाते। अंतर समय में नहीं, बल्कि उसके उपयोग में होता है।

सच तो यह है कि जिस कार्य को हम महत्व देते हैं, उसके लिए समय अपने आप निकल आता है। यदि कोई प्रिय व्यक्ति अचानक सहायता के लिए बुला ले, तो व्यस्त से व्यस्त व्यक्ति भी अपना कार्यक्रम बदल देता है। इसका अर्थ स्पष्ट है कि समय नहीं, प्राथमिकता निर्णय लेती है।

आज हम अनजाने में घंटों मोबाइल, सोशल मीडिया या बिना किसी उद्देश्य के स्क्रीन पर बिता देते हैं। बाद में जब कोई आवश्यक कार्य अधूरा रह जाता है, तो हम कहते हैं, “समय नहीं मिला।” वास्तव में समय नहीं, हमारी प्राथमिकताएँ भटक गई थीं।

प्राथमिकताएँ केवल काम की सूची नहीं होतीं, वे हमारे जीवन के मूल्यों का आईना होती हैं। यदि स्वास्थ्य प्राथमिकता होगा, तो व्यस्तता के बीच भी कुछ समय व्यायाम के लिए निकल जाएगा। यदि परिवार प्राथमिकता होगा, तो दिन का कुछ समय अपनों के साथ अवश्य बीतेगा। यदि सीखना और आगे बढ़ना प्राथमिकता होगी, तो परिस्थितियाँ कैसी भी हों, व्यक्ति स्वयं को बेहतर बनाने का प्रयास करता रहेगा।

इसका अर्थ यह नहीं कि हर व्यक्ति का जीवन समान रूप से सरल होता है। अनेक लोगों पर काम, परिवार और जिम्मेदारियों का इतना भार होता है कि समय निकालना वास्तव में कठिन हो जाता है। फिर भी, उन्हीं सीमित परिस्थितियों में लिए गए छोटे-छोटे निर्णय हमारी प्राथमिकताओं को उजागर करते हैं।

समय का सदुपयोग केवल अधिक कार्य करना नहीं है, बल्कि सही कार्य को सही समय देना है। व्यस्त होना और सार्थक होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। आज आवश्यकता अपनी दिनचर्या से अधिक अपनी प्राथमिकताओं का सही चयन करने की है।

समय की घड़ी सबके लिए एक समान चलती है, पर जीवन की दिशा हमारी प्राथमिकताएँ तय करती है। इसलिए जब मन कहे, “मेरे पास समय नहीं है”, तब एक बार अपनी प्राथमिकताओं की सूची को देखकर तय करें कि वास्तव में आपकी प्राथमिकता क्या है। क्योंकि समय कभी रुकता नहीं, वह केवल यह दर्ज करता रहता है कि हमने उसे किसे समर्पित किया।

इसलिए जीवन को बदलना है, तो घड़ी की सुइयों को नहीं, अपनी प्राथमिकताओं को बदलना होगा। जहाँ प्राथमिकताएँ स्पष्ट होती हैं, वहाँ समय का अभाव नहीं, बल्कि सही समय-प्रबंधन दिखाई देता है।

-सोनम लड़ीवाला
जयपुर (राजस्थान)

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