कुछ व्यक्तित्व पद से बड़े होते हैं और कुछ अपने व्यवहार से। डॉ. विकास दवे उन विरले साहित्यकारों में हैं, जिनमें विद्वता, विनम्रता और आत्मीयता का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। उनसे मिलने वाला व्यक्ति केवल साहित्य अकादमी के निदेशक से नहीं, बल्कि एक ऐसे संवेदनशील मनुष्य से मिलता है, जो संवाद को संबंध में बदल देना जानता है।
साहित्य के प्रति उनका समर्पण और बाल साहित्य के क्षेत्र में उनका उल्लेखनीय योगदान उन्हें विशिष्ट पहचान प्रदान करता है। उन्हें सुनते हुए बार-बार यह अनुभव होता है कि ज्ञान जितना गहरा होता है, अभिव्यक्ति उतनी ही सरल और प्रभावी हो जाती है। उनकी वाणी में सहजता है, विचारों में स्पष्टता है और दृष्टि में व्यापकता। उनके शब्द केवल जानकारी नहीं देते, बल्कि प्रेरणा भी जगाते हैं।
अन्तरा शब्दशक्ति परिवार को भी उनका स्नेहिल सान्निध्य प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है। संस्था के एक आयोजन में उनकी उपस्थिति ने यह अनुभव कराया कि वास्तविक विद्वता के साथ विनम्रता और आत्मीयता कितनी स्वाभाविक हो सकती है। नई प्रतिभाओं के प्रति उनका प्रोत्साहन और साहित्य के प्रति उनका समर्पित दृष्टिकोण लंबे समय तक स्मृतियों में बना रहता है।
आज जब प्रतिष्ठा के साथ अक्सर दूरी जुड़ जाती है, तब डॉ. विकास दवे का व्यक्तित्व यह विश्वास जगाता है कि ऊँचे पद पर रहते हुए भी व्यक्ति सहज, सुलभ और मानवीय बना रह सकता है। यही विशेषता उन्हें सम्माननीय ही नहीं, बल्कि प्रिय भी बनाती है।
जन्मदिवस के इस शुभ अवसर पर ईश्वर से प्रार्थना है कि उन्हें उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, सतत सृजनशीलता और नवऊर्जा प्रदान करें। वे इसी प्रकार साहित्य, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के आलोक को समाज में प्रसारित करते रहें।
जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ, आदरणीय डॉ. विकास दवे जी।
“विद्वता जब विनम्रता से मिलती है, तब व्यक्तित्व प्रेरणा बन जाता है।”
-डॉ. प्रीति समकित सुराना
संस्थापक
अन्तरा शब्दशक्ति
