मात पिता की छांव जो मिलती,
चिंता न फिर कोई सताती।
जोड़े खग के दें संदेशा,
ताकत एक दूजे से मिलती।
ऊंची डाल बैठे उड़ान भी ऊं ची,
मीठी भविष्य की बातें होतीं।
सुंदर सुखद सलौने सपने,
हरी डाल विश्वास संजोती।
पक्षी के कलरव से ही,
प्राणी जगत की रौनक बढ़ती।
-सीता गुप्ता
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
