“स्वानुभूति”
स्वानुभूति और आत्मप्रेम गलत तो नहीं है,
खुद को खोकर, किसी को पाना सही भी नहीं है,
जो चाहता है तुम्हे, या जिसे जरूरत है तुम्हारी,
उसे निश्चित ही तुम्हारी कद्र करनी होगी,
पर उससे पहले तुम्हे भी स्वानुभूति करनी है।
जब खो ही दोगे खुद को
तो किसी का प्रेम तुम्हारे किस काम का?
तो यह सोचना बंद करो, कि लोग क्या कहेंगे,
कहीं नहीं मिलेंगे ये चार लोग, जब समय की जरूरत होगी,
तब तुम ही होगे ,तुम्हारे लिए, खुद की जरूरत होगी।
सिर्फ सांस लेना ही तो जीवन नहीं है,
खुद से मिलना ही असली जीवन है।
-सोनम लड़ीवाला
जयपुर राजस्थान
