हैं अभी संभावनाएँ और जीवन ढल रहा
इस हृदय का क्या करें जो मोतियों-सा पल रहा
है अभी हाथों में कुछ तो जो अधूरा है अभी
हम प्रयासों में ही रत हैं, पूर्णता होगी कभी
हर कदम हर सोच अपनी जूझती है आज से
कल इन्हीं हाथों में सब कुछ जो समर्पित है सभी
यह समय की ही पकड़ है साथ कोई चल रहा,,,,,,
हम सदा संकल्प लेकर तानते हर तीर को
श्वास की हर तान लेकर गा रहे हर पीर को
है गति अविराम अपनी, दृष्टि भी उजली अभी
हम भँवर को पार करके आ लगे हैं तीर को
साथ अब भी है समय जो पास ही पल-पल रहा,,,,,,
हैं अभी अध्याय बाकी, वो समापन दूर है
क्या हुआ जो लग रहा है, कुछ कहीं पर चूर है
सब कदम हमने चुने हैं, पथ के यह कंकर सभी
मन सदा तैयार बैठा है सतत् जो चूर है
एक धूनी-सा सजग संकल्प है जो जल रहा,,
-सुनीता लुल्ला
