अंतर्मन पाती

प्रिय नंदिता,
बहुत सारा प्यार …

जीवन के उतार-चढ़ाव में अपना और मन का ध्यान रखने के लिए साधुवाद है तुम्हे।
नंदिता का अस्तित्व आखिर तुमने बनकर स्वय के मन से मना लिया ..
एहसासो की पाती तुम तो रोज ही लिखती हो, आज मेरा मन हुआ तुम्हे लिखने का
ऐसे ही अपना ख्याल रखो, और अपने आस को खुद में इतना भर दो कि मन की आस को किसी और से आस के रूप में स्वयं को आधीन कर लो।
मुझे अच्छा लग रहा तुम्हारा जीवन के प्रति सजगता और सत्य को निभाते हुए भी भीड़ से निकल खुद के साथ सफर करना। समाज के अनगिनत नियमो से निकल कर स्वयं के विश्वास के साथ अपने उन नियमो के साथ चलना जहाँ नारी को बंधक या कोई बेचारी भाव में नहीं। मैं खुश हूँ तुम्हारे साथ इस मन के सफर में जहाँ तुम रोज एहसासो के फुदकती और दुनियादारी को समझती हूँ।
किसी से अपेक्षा नहीं, किसी से समस्या नहीं, किसी का बुरा नहीं और सच सबसे अच्छा अपनी कमियों के साथ खुद को स्वीकार कर उन कमियों को दूर कर अपनी तलाश में लगातार ज़िन्दगी से मिलते जाना।
अपनी धुन में चलते जाना, लिखते जाना और धड़कनो के साथ थिरकते जाना.. संघर्ष का सामना करना बिना उदासी के जैसे करती आयी हो , जानती हो न आईना भी तुम्हारी उदासी नापसंद करता है।
खूब खुश रहना और नंदिता के साथ मुझमे समायी रहना, और हौसलों के साथ बढ़ते रहना .।
जीवन का खूबसूरत साथ स्वयं के साथ मिलते रहना, चलते रहना और एक दूसरे का बहुत ध्यान रखना, ठीक है न, मेरे साथ रहना। बहुत सी बाते है अंतर्मन की और तुम सब जानती हो।
अब लिखना बंद कर रही, पर तुमको सुनती रहूंगी, फिर किसी दिन तुम्हे अपना दिल खोलकर उतनी बाते लिखूंगी..!
कि एक सफर है ज़िंदगी और स्वयं से मिलकर थिरकती है ज़िंदगी।

मेरी_रुह

-नंदिता तनूजा
लखनऊ

एक उत्तर छोड़ें

अन्तरा शब्दशक्ति – हिन्दी साहित्य, प्रकाशन और रचनाकारों के सशक्तिकरण का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच।
संपर्क करें
antrashabdshakti @gmail.com
Call- 9009423393
WhatsApp-9009465259
antrashabtshakti.com

Copyright © 2026 Antra Shabd Shakti. All Rights Reserved. Powered by WebCoodee

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x