आज का विषय बहुत ही सुंदर अपने लिए जिए तो क्या जिए ;;;जो कहीं ना कहीं हमें जीवन जीने की कला भी सिखाता है। हमारे पूर्वज भी यही कहते थे कि मानव जन्म मिला है तो उसका सदुपयोग भी करो। सदा अपने लिए ही जिए तो ऐसा जीना क्या;;; कुछ परोपकार के काम करो कभी-कभी दूसरों के लिए भी जियो। नदियां पेड़ जानवर सब प्रकृति को कुछ ना कुछ लौटाते ही हैं, किंतु एक मनुष्य ही है जो सक्षम होते हुए भी स्वार्थ की राह पर चल पड़ता है जबकि मानव तन पाकर हम क्या नहीं कर सकते इसीलिए हमारे बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि अपने लिए जिए तो क्या जिए।
-साधना छिरोल्या
दमोह (मध्य प्रदेश)
