आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मेलजोल के लिए समय नहीं है | समय पति पत्नि बच्चें सभी पढ़ाई व नौकरी के चलते समय का अभाव रहता है |
हमारा मानना है प्रभु ने हमें जीवन दिया हम परोपकार करें
किसी के परेशानी, दुख में काम आये जिन्दगी तो पशुपक्षी भी जी लेते है पर मूक प्राणी है जो बोल नहीं सकते, गायों की सेवा करें सनातन धर्म में पशुपक्षी गाय को श्रेष्ठ माना है
उदा* – हमने नेत्र शिविर लगाया
ऐसे बुजुर्ग जो कांपते पुराने कपड़े,लकड़ी का सहारे लेकर पड़ोसियों के साथ आये , कहने लगे-ना बेटा बहू दिखाते, ना बच्चे, में आंख दिखाने आया हूँ कुर्सी पर बैठाया कुछ समय बाद चैक अप हुआ,बीस आपरेशन फी़ में कराए आज जब आपरेशन के बाद उन बुजुर्गों का फोन आया
बिटिया हम बहुत अच्छे से देख सकते है, बहुत बहुत धन्यवाद
बिटिया सदा खुश रहो ! हमारी तो आंखें डबडबा आई प्रभु का
लाख शुक्रिया, जो हम किसी के काम आये, बुढ़ापा सभी का आयेगा हमें इस काबिल बनाया
दूसरों के दुख बांटते चलें, अपने लिए तो सभी जीते है जो औरों
या दूसरों के लिए जी ये यही जीवन की सार्थकता है |
-ऊषा नौगरहिया
कटनी
