वकील ने कूट रचना कर याचिका बनाई और उसमें फर्जी दस्तावेज लगा दिए इसके लिए उसने मुवक्किल से मुंह मांगी फीस ली। याचिका कोर्ट में दायर हो चुकी थी ।जब सुनवाई के लिए मामला लगा तब वकील ने अनेकों दलीलें पेश की। जज साहब वकील की दलीलों से सहमत थे इसलिए निर्णय उनके पक्ष में हुआ।
इस जीत का सब उत्सव मना रहे थे। मिठाइयां बांटी जा रही थीं।किसी को कानों कान खबर न थी कि यह फर्जीवाड़ा है।
मैं उस केस को पूर्ण रूपेण भाँप गया था और मेरे मुख से अनायास ही निकल पड़ा -यह तो संविधान का अपमान है, घोर अपमान।
-अविनाश ब्यौहार
जबलपुर (मप्र)
