मौसम कैसा भी हो, ढलना आ जाएगा।
क्या धूप क्या छॉंव, चलना आ जाएगा।
सफ़र करते-करते यहॉं तक आ गए।
आगे भी मंज़िल तक पलना आ जाएगा।
-मनीष कुमार पाटीदार

मौसम कैसा भी हो, ढलना आ जाएगा।
क्या धूप क्या छॉंव, चलना आ जाएगा।
सफ़र करते-करते यहॉं तक आ गए।
आगे भी मंज़िल तक पलना आ जाएगा।
-मनीष कुमार पाटीदार
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