रिश्तों की डोर
बड़ा आसान है न किसी पर आरोप लगाना कितनी आसानी से तुमने कह दिया कि दी हम दोनों को साथ खुश नहीं देख सकतीं तुम जानती कितना हो तुम्हें क्या मालूम की वो मेरे लिए क्या मायने रखती हैं। राज की कड़क आवाज़ सुन कर वीणा सकपका कर रह गयी ।
मगर हिम्मत कर हाँ तो इसमें चिल्लाने वाली क्या बात है प्रति उत्तर में वीणा ने उससे भी तेज आवाज में प्रश्न दाग दिया । तुम तो सारा दिन बाहर रहते हो तुम्हारी बहन तुम्हारे पीठ पीछे मुझे सताने के नित नए बहाने ढूढती है। अरे तुम्हारे ऊपर एहसान होंगे उनके इसका मतलब यह नहीं कि अब भी घर पर उन्हीं की हुकूमत चलेगी ये घर मेरा है और मेरे हिसाब से होगा सब कुछ उन्हें यदि गलत लगता है तो चलीं जायें वो यहाँ से शायद हम दोनों के लिए यही बेहतर होगा।
कमरे से आती हुई दोनों की आवाजें अब रागिनी के बर्दाश्त से बाहर थीं मन को मजबूत कर एक निश्चय किया और उसपर दृढ़ता से अडिग रही , दरवाजे पर दस्तक दी ।
दी को सामने देख राज का शर्म से सिर झुक गया, दी वीणा की तरफ से मैं माफी मांगता हूँ उसने जो कुछ कहा नादानी में कहा आगे कभी ऐसा नहीं होगा मैं आपके बिना नहीं रह सकता ।
लेकिन रागिनी ने सपाट शब्दों में कहा राज मैं चाहती हूं कि तुम और वीणा अपनी जिंदगी अपने तरीके से जियो कल को कोई ये आरोप न लगाये कि मैंने अपने लिए तुम्हारी खुशियाँ छीन लीं मेरी हर खुशी तुम्हारी खुशियों से जुड़ी है अगर तुम खुश रहोगे तो मैं भी खुश रहूँगी, तुम्हें दुखी और परेशान हाल मैं नहीं देख सकती , हाँ मगर मैं यहाँ से नहीं जाऊँगी तुम अपने लिए रहने का इंतजाम कर लो, आते जाते रहना भगवान तुम दोनों को हमेशा खुश रखे मैं तो हर पल यही प्रार्थना करती हूँ। रिश्ते पास रह कर कडवाहट भरे हो जाये तो दूर रहना बेहतर है शायद !! उनमें मिठास आ जाये ,रिश्तों की डोर ज्यादा खींचने से टूट जाती है इसलिए उन्हें समय रहते थोड़ा डील दे देना चाहिए है न ।
नहीं दी मैं आपको अकेले नहीं छोड़ सकता आपने मुझपर अपनी सारी जिंदगी लगा दी और जब आपके लिए कुछ करने की मेरी बारी आई तो आप मुझे खुद से दूर कर रहीं हैं ऐसा नहीं हो सकता ।
लेकिन रागिनी अपने फैसले पर अडिग रही और राज की बातों से टस से मस ना हुई , बस इतना कहा मैं तुम्हारे लिए आज भी वही दी हूँ जो कल थी और हमेशा तुम मेरे वही प्यारे भाई रहोगे , बस अब समझो तुम्हारा घोंसला छोड़कर उड़ने का समय आ गया है ।
तीनो के मन अलग अलग दिशाओं में भाग रहे थे
रागिनी का फैसला सुनकर वीणा आवाक रह गई, वो अपने भाई को घर से जाने कह देगी यह बात तो उसके वहमो गुमान में भी ना थी उसकी तो मुँह माँगी मुराद पूरी हो गई थी ,मगर अफसोस था कि उसे घर से जाना होगा हूँह खैर अब वह आजाद है अपनी मन मर्जी करने वाह वाह भगवान धन्यवाद आपका ।
राज का दिल चित्कार रहा था आज उसे अपनी पत्नी की नादानियों की वजह से अपनी माँ जैसी बहन से दूर जाना होगा जिसकी मेहनत की वजह से वो आज यहाँ तक पहुँचा था काश वीणा हमारे जज्बात समझ पाती काश !! वो दी के प्रति मेरे उत्तरदायित्व को समझ पाती दी तो उसे उसके भले के लिए ही समझाती थीं ।
रागिनी मुतमईन थी जिंदगी में अपने उपर आई सारी जिम्मेदारियाँ उसने बखूबी निभाई थीं अपनी बहनो को पढ़ाकर उनके घर का कर दिया था आज भी अपने भाई को उसकी खुशहाल गृहस्थी के लिए अपने बंधन से मुक्त कर दिया हम् ईश्वर मेरे भाई को हमेशा खुश रखना आखिर भाई की खुशहाल जिंदगी ही तो उसका सपना था और शायद !! उत्तरदायित्व ।
-स्मृति गुप्ता
जबलपुर
