हिंसा में कोई मर गया
फिर
बातें हुई
मुलाकातें हुई
धर्म-कर्म की सौगातें हुई
फिर
सदमे में मां-बाप हैं
बेघर सा परिवार है
निवाले की दरकार है
आंसुओं का पारावार है
टूटे सपनों की चीत्कार है
फिर
बौनी हो जाती है
हर खुशी
रह जाता है परिवार
अनंत यंत्रणा के लिए तैयार……..
-अनुपमा शर्मा
रुड़की
