“गौरैया की प्यास”
तप रही धरा गगन से बरसती है आग जहां
बूंद बूंद शीतलता चाहती मानव की आस वहां
ओ री गौरैया तप्त जलते भू नभ पर क्या
जल की तलाश में चपल नयनों.से खोजती।
प्यासे हैं लोग जहां जल नहीं उष्मित पानी
कैसे बुझ पायेगी तेरी अनबुझी प्यास यहां।
-पद्मा मिश्रा
जमशेदपुर
