खिलेगे फूल बागों में,जरा कलियों को हँसने दो।
मिलेगे गुल बहारों में,जरा सावन बरसने दो।
जहाँ अपने करे साजिश हकीकत हार जाती है।
तमाशा खेल सब छोड़ो,कहानी सबको सुनने दो।।
हमारा हाल मत पूछो,बताओ तुम खबर अपनी।
हमारी दोस्ती प्यारी,मिले दो यार हँसने दो।।
अमीरी क्या मिली उनको,गरीबों को भुला बैठे।
पिए हैं लोभ का प्याला,इन्हें बिन मौत मरने दो।।
सदा मन प्रेम की राहें पड़ी सूनी तरसती हैं।
जहाँ मन भूख दौलत है,तिजोरी लोभ भरने दो।।
धरो मन धीर रे प्राणी,समय सब कुछ पलटता है।
समय का खेल है नूतन ,कर्म की नाव बहने दो।।
-नूतन “प्रयागरजनी”
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)
