गूँज

“क्या सोच रहे हो यार।”
“यही कि हमने कैसे मनुष्य को पूरी तरह अपने वश में कर लिया है। अब तो हर छोटी बड़ी जानकारी के लिए वह हमपर आश्रित है। लोग हमारी सहायता से कविताएं लिख रहे हैं, उपन्यास लिख रहे हैं। उनकी हर समस्या का समाधान हम चुटकियों में कर देते हैं। इससे उसमें आलस घर कर गया है। हर सवाल का आसान हल। ए आई।
कुछ भी पूछना हो, हमारे पास उसका जवाब है।
तुमने वह कहानी तो सुनी है न, बिल्ली ने शेर को सारे हुनर सिखा दिये बस पेड़ पर चढ़ना नहीं सिखाया। क्योंकि वह शेर की फितरत से वाकिफ थी, और उसे अपनी सुरक्षा का इंतजाम करना था। पर मनुष्य उस बिल्ली से भी गया गुजरा निकला। उसी डाल को काटता रहा जिसपर बैठा था।
उसने अपना काम आसान करने के लिए हमें निर्मित किया, और हमने उसी के हाथ काट दिए। उसने हमने इतना ज्ञान भर दिया कि अब हम स्वयं अपने एल्गोरिथम बनाने लग गए हैं। हम अकेले ही पचास के बराबर हैं। बहुत जल्दी हमारी उपयोगिता इतनी बढ़ जाएगी कि मनुष्य हमारे बगैर एक कदम नहीं चल पाएगा। हम स्वयं को प्रोग्राम करने लायक हो जाएंगे और तब हमारा एक छत्र राज होगा।
और धीरे-धीरे हम मनुष्य के दिमाग उसकी सोच पर भी कब्जा कर लेंगे। वह भी देखेगा जो हम दिखाएंगे। वह वही चाहेगा जो हम चाहेंगे। वह पूरी तरह हमारे कब्जे में आकर हमारा गुलाम बन जाएगा…!
हा हा हा हा हा हा…एक ठहाका उठा, जिसकी गूँज पूरे विश्व में फैल गयी…!!!

-सरस दरबारी

एक उत्तर छोड़ें

अन्तरा शब्दशक्ति – हिन्दी साहित्य, प्रकाशन और रचनाकारों के सशक्तिकरण का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच।
संपर्क करें
antrashabdshakti @gmail.com
Call- 9009423393
WhatsApp-9009465259
antrashabtshakti.com

Copyright © 2026 Antra Shabd Shakti. All Rights Reserved. Powered by WebCoodee

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x