घमंड किसका रहा है,
आजतक ज़माने में,
कितने आए और मिट गए,
वर्चस्व अपना बनाने में।।
घमंड….
रह गए तो, बस उनके कर्म,
इतिहास नया बनाने में।।
घमंड किसका……..
बाहरी आवरण आडंबर मात्र,
चंद दिनों की खूबसूरती दिखाने में l
घमंड……
असली खूबसूरती तो आत्मा और आत्म चिंतन की है,
बड़े बड़े सूरमा भी मिट गए इस ज़माने में।।
घमंड……
सामने वाले को समझकर भी नासमझ होना,
बहुत बडी गलती,
सालों लग जाते हैं,
भुगतान इसका उठाने में।।
घमंड…….
आत्मा की आवाज़ को दबा देना,
बहुत बड़ा कारण ख़ुद को मिटाने में।।
घमंड…..
-पूनम (कल्पना)
