शहर खूबसूरत था
घर आलिशान थें।
सुवासित थें।
क्योंकि
घरों का सारा टट्टी, पेशाब, मवाद, खंखार
खूबसूरत ड्राईंगरूम के नीचे छुपाये हुए
पाईप से गुजर जाता था
फिर उससे फर्टिलाइजर बने या ईंधन
खूबसूरत ही बढ़ती थी
फूलों से या फव्वारों से।
सीवर के भीतर की गन्दगी
का किसी को भान न था
जरूरत भी नहीं थी।
फिर एक दिन सीवर खुला
बदबू फैला
काकरोच बच्चें फैलने लगे
पूरे शहर में।
-विजय अग्रहरि ‘आलोक’
