“गौरैया की प्यास”
चीं चीं करती थी जो पहले
चीख चीख कर कहती है
इतनी गर्मी सूखी नदियां
मानव तेरी गलती है।
तुम तो खोद खोद कर धरती
अपनी प्यास बुझा लोगे
जो धरती न खोद पाए तो
बर्फ पहाड़ पिघला दोगे
सोचो हम नन्हे से पंछी
कैसे जल पी पायेगें?
मरना तो आसान लगे है
कैसे ही जी पायेगे?
अगर पुराना है कोई रिश्ता
उसको तुम अब निभा लेना
हम लोगो की खातिर छत में
थोड़ा पानी रख देना।
प्रकृति में सब जीव एक हैं
कोई न छोटा न कोई बड़ा
बड़ी बड़ी सी बात सिखाये
ये नन्ही सी गौरैया।।।
-डॉ आशु जैन
