चेहरे का दर्द

नीरजा कालिज से लौटी देखा कालोनी पूरी तरह पुलिस छावनी बनी है। इतना बड़ा महानगर उसकी सबसे अधिक पाश कालोनी । कालोनी का माहौल देख कर लग रहा था कुछ अधिक ही भयावनी घटना घटी हैं । सब लोग अपने अपने फ्लैट में से झांक रहे थे । उसकी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी । वह जैसे ही अपने टावर में पहुँची पुलिस ने रोक दिया । नीरजा ने पूछा मैं अपने फ्लैट में भी नहीं जा सकती क्या ?

  इंसपैक्टर ने पूछा मैडम कौनसे नं का फ्लैट है उसने कहा तीसरी फ्लोर पर 306 नं । उसने तुरन्त कहा 305 में पति पत्नी और दोनों बच्चो की डैड वाडी हैं कार्यवाही चल रही है। नीरजा एक दम सन्नाटे में आगयी । बोली अरे आप गलत कह रहे हैं सलिल और रमा के साथ तो सुबह उसकी बाते हुई हैं दोनों बच्चे  पल्लव और लवीश आज स्कूल नहीं गये थे मेरे पूछने पर रमा ने कहा था नीरजा दी आज हमको बहुत जरूरी काम से कहीं जाना है इसलिये स्कूल नहीं भेजा । इंसपैक्टर ने कहा कि सुसाइड नोट मिला है। 

   नीरजा चुपचाप एक कुर्सी पर बैठ गयी । सोचने लगी क्या  दुनिया से ही जाना था । वह रमा को छोटी बहन की तरह प्यार करती थी । नीरजा यहाँ अकेली रहती थी बेटा विदेश था पति बहुत पहले दुनिय से चले गये थे । नीरजा इन्टर कालिज में लेक्चरार थी । सलिल और रमा उसका बहुत ध्यान रखते थे । तभी फोन की घन्टी बजी देखा उसकी सहेली का फोन था उसे इस घटना के बारे में पता लगा तब उसने फोन किया । उसी समय नीरजा को कोई मैसेज what's app पर रमा के नं पर दिखाई दिया उसने खोला उसमे रमा सलिल और दोनों बच्वो की फोटो दिखाई दी । वह सेल्फी सलिल ने ली थी और रमा दोनों बेटो को चिपटाये हुये हैं और आँखों में आंसू हैं । नीचे लिखा था दीदी अलविदा । नीरजा के आंसू नहीं रुक रहे थे । सुसाइड नोट से पता लगा कि सलिल पर कर्ज था और लगातार  धमकी मिल रही थी वह इतने तनाव में था कि उसे और रमा को दोनों बच्चों के साथ आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ा ।

     नीरजा सोच रही थी एक बार मुझसे तो कहता सलिल कभी उसके मुस्कुराते चेहरे पर दर्द नहीं दिखाई दिया । वह शायद कुछ समाधान निकाल पाती । पर्स मे पल्लव और लवीश की चॉकलेट भी सुस्त थी । वह कालिज से लौटते हुये प्रतिदिन दो चॉकलेट लेकर आती थी।

-डॉ. मधु आंधीवाल

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