दीवाल में एक आला है
आले में दीप धर दिया गया है
दीप किसी का चेहरा
या आँखें भी हो सकती हैं
जो प्रज्ज्वलित हैं
आँखों का प्रकाश फैला है कमरे में
प्रकाश की अनुपस्थिति होगी
तब अवश्यम्भावी है
अंधकार का होना
दीवाल जिसके आले में
धरा है दीप या चेहरा
आधुनिक है वहाँ आँखों का होना
प्रासंगिक भी
जबकि हर एक दीवाल
होती है प्राचीन
अदृश्य दीवालें भी
सोच की दीवालें भी
विचारों की भी
दीवालों में आले का होना
संभावनाओं का होना है
दीवालों की वेदना और खुशी
आले के पीछे रही आती है हमेशा।
-शुचि मिश्रा
गुरुग्राम हरियाणा
