दुआएं

अभी दो साल पहले महानगर की एक प्राइवेट कंपनी में रिनी की जॉब लगी थी। एक दिन, रात के दस बजे ऑफिस से निकलकर एक ऑटो मिला, वो उसमें सवार हो गई। तभी उसकी नज़र ऑटो-चालक पर पड़ी ,जो उम्रदराज़ लग रहे थे। कुछ देर सोचने के बाद रिनी से नहीं रहा गया और उसने सवाल पूछ ही डाले कि “आप इस उम्र में ऑटो चला रहें हैं, आपके घर में और कोई नहीं है जो आपकी मदद करें,वैसे आपके घर में कौन-कौन हैं? ऑटो-चालक ने बड़ी अच्छी तरह जवाब दिया-सब हैं। तीन लड़कियां हैं और‌ एक लड़का भी है, जो अलग रहता है। बाकी घर-खर्च और बेटियों को पढ़ाने के लिए ऑटो चलाना पड़ता है, इसी से परिवार चलता है।” इतनी देर में रिनी का घर आ गया और उसने उतर कर पैसे दिए। ऑटो-चालक ने पैसे रखते हुए कहा- “रोज़ इतनी सवारी बैठती हैं, लेकिन किसी ने यह नहीं पूछा कि आप इस उम्र में ऑटो क्यों चलाते हैं। आप बहुत दयालु स्वभाव की हैं। खुदा आपको खूब तरक्की दे, खूब शोहरत दे”। रिनी ने उन्हें धन्यवाद दिया और सोचा कि दो मीठे बोल के बदले इतनी अनमोल दुआओं का तोहफा उसे आज मिला, जो जीवन की शक्ति है और खुशियों का एटीएम भी है।

-डॉ अमृता शुक्ला

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