आंधियों का तूफानों का क्या कीजिए
बस गुजर जाने भर की दुआ कीजिए
गम के बादल छटे हो गई चांदनी
आप खुश हैं अगर तो हंसा कीजिए
हंसने से बोझ दिल का उतर जाता है
इस तरह आप दिल की दवा कीजिए
माना राहें बहुत मुश्किलों से भरी
सब्र थोड़ा तो दिल में रखा कीजिए
हर जगह जल्दबाज़ी नहीं काम की
जल्दबाज़ी को जल्दी दफा कीजिए
बोझ कम है अगर तो हैं रस्ते सरल
आप सामान कुछ कम रखा कीजिए
आप खुद ही हो खुद की मदद के लिए
आप खुद का सिरफ आसरा कीजिए
प्यार की भीख दुनिया से मत मांगना
प्यार खुद से ही पहले ‘अदा’ कीजिए
-पूर्णिमा जायसवाल अदा
