एक दिन
जरूर मिलेगा
चाहा हुआ संसार
खुलेगा एक अलौकिक द्वार,
जो ले जायेगा तुम्हें सपनों के पार,
तुम तैयार हो मेरे संग चलने के लिए,
देर सबेर ही सही पूरा होगा पावन इंतजार,
आहा! बड़ी कठिन है राह अभी,
मन का आंगन भी बुहारा नहीं है,
स्वार्थ पी कर परिंदों ने
आकाश भी नापा नहीं है,
देखो वो घिसट रहे हैं कुएं के अंदर,
दुनिया की विशालता को जान ही नहीं पाये,
वहां धुंध के पार रौशनियों का संसार है
उस गहरी चादर को चीरने का हुनर अभी आया नहीं है,
जज्बा चाहिए दुनिया को मुट्ठी में समाने के लिए,
देर सबेर ही सही कायनात तुम्हें अपना सकती है।
-नमिता दुबे मिशा
