नया सवेरा, नई उमंग है,
फिर शिक्षा का पावन संग है।
सपनों को साकार करें हम,
आओ मिलकर स्कूल चलें हम।
चलो, फिर वही दिन है आया,
नया सत्र नई उमंगें लाया।
बस्ता फिर कंधों पर सजाएँ,
आओ मिलकर स्कूल चलें हम।
छुट्टियों की मस्ती छोड़ें,
आलस की हर डोरी तोड़ें।
ज्ञान-दीप फिर से जलाएँ,
आओ मिलकर स्कूल चलें हम।
वही प्रार्थना, वही तराना,
गुरुजनों का स्नेह-खज़ाना।
संस्कारों के फूल खिलाएँ,
आओ मिलकर स्कूल चलें हम।
वही कक्षा, वही किताबें,
सपनों से भरतीं सब आँखें।
मेहनत से भविष्य सजाएँ,
आओ मिलकर स्कूल चलें हम।
एक टिफ़िन, अनेक हिस्से,
हँसी-ठिठोली, प्यारे किस्से।
मित्रता का मान बढ़ाएँ,
आओ मिलकर स्कूल चलें हम।
अक्षर-अक्षर दीप जलाता,
जीवन का पथ भी दिखलाता।
ज्ञान से अपना मान बढ़ाएँ,
आओ मिलकर स्कूल चलें हम।
विद्यालय केवल भवन नहीं है,
यह जीवन का सुंदर गहना है।
शिक्षा, सेवा, शील अपनाएँ,
आओ मिलकर स्कूल चलें हम।
सब मिलकर प्रण दोहराएँ,
देश का उज्ज्वल कल बनाएँ।
सपनों को साकार बनाएँ,
आओ मिलकर स्कूल चलें हम।
कलम बने जब हाथ की शक्ति,
ज्ञान बने जीवन की भक्ति।
उज्ज्वल हो हर जन का कल,
आओ मिलकर स्कूल चलें हम।
-डॉ संगीता बिंदल
