पाँच दोहे–माँ को समर्पित

माँ ममता का रुप है,माँ है सकल जहान।
माँ कल्पवृक्ष की छाया,माँ होती भगवान।।
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माँ से जन्में धरा पर,पीर फकीर महान।
माँ से कायम जगत है,माँ से है भगवान।।
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माँ ममता की मूरत,सकल गुणों की खान।
माँ गीता का संदेश,माँ बाइबल कुरान।।
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माँ ईश्वर का रूप है,माँ ही पीर फकीर।
सच है बस इतना सही,माँ लिखती तकदीर।।
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कुछ नाहीं रे माँ बिना,माँ बिन घोर अंधार।
प्रथम गुरु भी माँ है,माँ जीवन आधार।।

-कृष्ण कुमार निर्माण
करनाल, हरियाणा

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