नमस्कार मंच। अंतर्राष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस हर साल 3 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों को सिंगल-उपयोग वाले प्लास्टिक बैग से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करना और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों जैसे कपड़े या जूट के थैलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है。वैश्विक अभियान: यह दिन पूरी दुनिया में प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए एक वैश्विक जागरूकता अभियान के रूप में मनाया जाता है। भारत में नियम: भारत सरकार द्वारा पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए 1 जुलाई 2022 से देश भर में सिंगल-उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं (जैसे- स्ट्रॉ, प्लास्टिक प्लेट, और 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले कैरी बैग) पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह सच है कि कुछ सालों से पालिथिन का उपयोग निरंतर बढ़ता जा रहा है। प्रशासन के द्वारा इसके उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया और पतली पॉलिथिन का विकल्प दिया था। कपड़े से बने थैली,बैग को चलन में लाने का सुझाव दिया था। ये पालिथिन के कारण कचरा बढ़ता है क्योंकि ये सालों साल नष्ट नहीं होती , ज़मीन ऐसे ही पड़ी रहतीं हैं।
हमारे बचपन में सभी सामान कागज़ के लिफाफे में दिया जाता था।मेरा ख्याल है कि सन् 80 के बाद पालिथिन का प्रयोग शुरू हुआ और अब तो यही दिखाई देता है।लेकिन लोगों को इन सब बातों के साथ स्वच्छता को लेकर गंभीरता नहीं है और जागरूकता भी नहीं है। कुछ लोग हर समय अपने लाभ के बारे मेंकुछ लोग हर समय अपने लाभ के बारे में ही सोचते हैं। परिणाम स्वरूप सामान का लेन देन में यही प्रयोग में लाते हैं।नियत जगह पर डस्टबिन रखने के बाद भी इधर-उधर प्लास्टिक फेंककर आगे बढ़ जाते हैं। पार्क में यह रखा जाता है लेकिन मैंने खुद नोटिस किया किया लोग का पीकर वहीं बैंच के नीचे, सामने कचरा फैला कर चले जाते हैं। इनमें यही प्लास्टिक में सामान भरा रहता है।इन सबके नुकसान के विषय में सोचने, जानने की आवश्यकता ही नहीं समझते। यही पालिथिन नालियां जाम कर देती हैं। पानी ठीक तरह से बहता नहीं है इसलिए थोड़े ही बारिश के साथ सड़कों, गलियों में पानी भर जाता है। मानसून से पहले सरकार नालियों की सफाई करवातीं हैं लेकिन फिर भी नकारात्मक परिणाम आया है। यदि सभी इन प्लास्टिक का उपयोग बंद कर दें या डस्टबिन में ही कचरा डाले तो स्वयं की मुसीबत कम होगी।लोग खाने-पीने की चीजें पालिथिन सही जानवरों के आगे ड़ाल देते हैं ।भंडारों के आयोजन के लिए भी होड सी लगी रहती है। भंडारे के बाद पत्तलों को बहुत बड़ी पॉलीथिनों में बांधकर किनारे रख दिया गया था। जिसमें से जानवर खाने की कोशिश करते हैं।उस दिन एक न्यूज़ थी कि गाय के पेट का आपरेशन करके 93किलो प्लास्टिक निकाली गई। ऐसे आयोजनों के बाद की गाड़ी में कचरा डाला जा सकता था। केवल शासन के ऊपर निर्भर न रहकर अपनी जिम्मेदारियों को समझें।इस तरह पालिथिन और कचरे से अनेक बीमारियों, गंदगी और जल भराव की समस्या को हल करने में मदद मिलेगी।
-डॉ अमृता शुक्ला
