पास दरिया है , इक किनारा है
दिल हमारा है और तुम्हारा है
चाँद ख़ामोश क्यूँ हो बोलो कुछ
चाँदनी रात का नज़ारा है
छत पे आता है जब अकेले तो
चाँद करता मुझे इशारा है
ख़ौफ़ मुझको नहीं अँधेरों से
साथ किस्मत का इक सितारा है
ये किसी एक का चमन है नहीं
ये हमारा है , ये तुम्हारा है
बाग़बाँ है बहुत बड़ा अहमक़
करता कलियों का ये ख़सारा है
है मुहाफ़िज़ मेरा ख़ुदा यारो
मेरे रब का मुझे सहारा है
राज़ की बात एक है ‘ऐनुल’
दिल मेरा आज भी कुँवारा है
-डॉ. ऐनुल बरौलवी
इंडिया
