पिता के होने.. और न होने में..

पिता के होने…, और न होने में….,
जमीं-आसमां जैसा अंतर है!!

संग पिता के हरा भरा और खूबसूरत दिखने वाला बागवां भी….,,
उनके बिना सूखा और बंजर है!!!

पिता है तो जिंदगी ऐश में गुजरती है!!
बिन पिता के सब के साथ कैश में भुनती है!

पिता अपने बच्चों के लिए, चांद तारे जमीन पर उतारते हैं….!
वर्ना…., फर्ज और कर्ज के बोझ दिन में तारे दिखाते हैं!!!

जब कोई बात बिगड़ती है और जिंदगी गफलत में पड़ जाए,….
पापा हमेशा आगे रहते हैं!!!

वर्ना,… जीवन की आपाधापी में वारे-न्यारे होते हैं!!

मां, नौ महीने गर्भ में सहेजती है अपने बच्चे को!!!
किंतु पिता तो…, पूरी जिंदगी दिमाग से तरासते हैं अपने बच्चे को!!!

मौन रहकर भी, इजहारे-स्नेह में मंद मंद मुस्कुराते हैं!!
और हम उनके सीने से लग बिंदास खिलखिलाते हैं!!!

पिता के साथ, हम पचपन वाले भी अपना बचपन जिंदादिली से जीते हैं!!!
वर्ना….., बचपन में ही उम्र से पहले बड़े हो जाते हैं!!

जिंदगी के साथ और जिंदगी के बाद भी…,
नाम और पहचान तो सिर्फ पिता से ही मिलती है!!!

चाहे कोई कितना भी सगा-अपना हो…,
पिता की कमी हर वक्त खलती है!!!!

पिता के बिना जिंदगी अधूरी रहती है
………. जिंदगी अधूरी रहती है!!!

-रेनु दीपक खर्द
दतिया(म.प्र.)

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