फिर चढ़ी प्यार की ख़ुमारी है

चाँद रातों का कैफ़ ज़ारी है
फिर चढ़ी प्यार की ख़ुमारी है

हर नज़ारा लगे है घायल-सा
यार के नैन या कटारी है

जिस्म चंदन है चाँद-सा चेहरा
ख़ूबसूरत चुनर सितारी है

ख़ूब महके हैं लफ़्ज़ काग़ज़ पर
ये ग़ज़ल यार ने संवारी है

दिल से निकली हैं ‘रागिनी’ ग़ज़लें
हर ग़ज़ल यार तुम पे वारी है

-डॉक्टर रागिनी स्वर्णकार
इंदौर

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