बंदर

बाल गीत

कूद – कूद कर बंदर सारे, घर – घर धूम मचाते।
चढ़े पेड़ पर आम खा रहे, बच्चों को ललचाते।।

आधा खाए और गिराए, घूमे डाली – डाली।
झड़े आम फैले हैं नीचे, उन्हें समेटे माली।।

लगा नौतपा हवा गर्म है, वन पशु छाँव न पाते।
कूद-कूद कर बंदर सारे,घर -घर धूम मचाते।।

गाय – बैल सब भटक रहे हैं, चिड़िया आशा भरती।
बिजली के खंभे से लटके, चिया प्यास से मरती।।

दाना – पानी बाहर – छत पर, मिलता प्यास बुझाते।
कूद-कूद कर बंदर सारे,घर – घर धूम मचाते।।

हरियाली बिन जीव न बचते, कटते जंगल सारे।
प्यासी धरती सूखी सरिता,सर्व बचाना प्यारे।।

पर्यावरण संरक्षण करना,लक्ष्य एक अपनाते।
कभी न आते वन – पशु – बंदर, और न धूम मचाते।।

-अमिता रवि दुबे

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