बरसो तो बादल हो जाना

बरसो तो बादल हो जाना,
तरसो तो मरुथल हो जाना ।
प्यार करो, तो करना ऐसे,
कम से कम, पागल हो जाना ।

रिश्तों के हैं रूप हज़ारों,
प्रेम का कोई रूप नहीं है ।
हम वो प्रेम निभायेंगे जो,
प्रचलन के अनुरूप नहीं है ।

मैं कांधा हो जाऊं पिता का,
तुम मां का आंचल हो जाना ।
प्यार करो, तो करना ऐसे,
कम से कम पागल हो जाना ।

-भूमिका जैन “भूमि”

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