मेरा संबंध क्या है बेबसी से
चलो अब पूछते हैं ज़िंदगी से
रुकी है नींद रस्ते में कहीं पर
नयन उम्मीद बाँधे हैं कभी से
पलक की ओट से बाहर न आना
कहा हमने मुहब्बत की नदी से
हमें ख़ुद से शिकायत कब हुई है
मगर हमको गिला है हर किसी से
मुझे हर ज़ख़्म अपनों से मिला है
तो क्या डरना किसी भी अजनबी से
उसी ने पंख तोहफ़े में दिये हैं
कि जिसने पैर बाँधे हैं कड़ी से
हक़ीक़त इश्क़ की मैं जानती हूँ
कि अब तो बाज़ आओ दिल्लगी से
-शीतल वाजपेयी
