भावनाएँ शब्दों की मोहताज नहीं होतीं,
हर बात कहने को आवाज़ नहीं होती।
कभी आँखों की नमी बयाँ कर जाती है बातें सारी
कभी मुस्कान में भी होती है एक पूरी कहानी।
हर रिश्ता वादों से नहीं चलता,
विश्वास से उसकी नींव बनती है।
जहाँ अपनापन सच्चा होता है,
वहाँ खामोशी भी बातें करती है।
हर बार “मैं ठीक हूँ” सच नहीं होता,
कई दर्द मौन में पलते रहते हैं।
जो अपने होते हैं, वे बिना कहे ही,
मन के अनकहे भाव पढ़ लेते हैं।
शब्द कभी कम पड़ जाते हैं,
पर संवेदनाएँ कभी कम नहीं होतीं।
जो दिल से निकलकर दिल तक पहुँच जाएँ,
वहांँ भावनाएँ सचमुच शब्दों की मोहताज नहीं होतीं।
-सोनम लड़ीवाला
जयपुर (राजस्थान)
