एहसासों की ठौर में
ज़िंदगी का मेला है….
जब दिल ने चाहा ने
दूजे दिल से खेला है ..
मतभेद की आग में
साज़िशों का झमेला है
छुपते-छुपाते सच को
झूठ का यहां रेला है ……
भीड़ के साथ में भी
हर मन तो अकेला है
बात पते की कहूं गर
गम ने सबको झेला है…
गज़ब की कलाकारी
एहसासो से मारामारी
अफवाहे ही तो फैला है
ईमान माँगे वफादारी…..
दुनियाँ तो देखो सच
ये इंसानो का गोला है
स्वार्थ से बनते रिश्तो का
एक-दूसरे को धकेला हैं….
कि फुर्सत में बैठी
ज़ब एहसासों ने छेड़ा है..
दूर से देखा तो दुनियां
खूबसूरत और
सच मे झमेला हैं..!!
-नंदिता तनूजा
लखनऊ (उत्तर प्रदेश )
