एक था राजा एक थी रानी
उनकी थी एक बिटिया रानी ।
नन्ही सुंदर राजकुमारी
राजदुलारी सबकी प्यारी ।
हँस कर जब करती वह बात
चमकें मोती जैसे दाँत ।
खाती वह पकवान मिठाई
दाँतों की न करे सफाई ।
न मंजन न ही दातौन
उसे भला समझाये कौन!
कुछ ही महिनों के पश्चात
सङने लगे चमकते दाँत।
राज-वैद्य को तब बुलवाया
वह बेचारा दौङा आया।
मंजन अच्छा एक बनाया
राजकुमारी को समझाया।
यदि है इन दाँतों से प्यार
मंजन करो रोज दो बार।
सुबह जागरण तब हो मंजन
रात्रि-शयन से पहिले मंजन।
बिटिया ने कहना माना
मंजन का महत्व जाना।
कुछ ही महिनों के पश्चात
चमके मोती जैसे दाँत ।
-राजेंद्र श्रीवास्तव
