कौन है मजदूर?
जो मेहनत मजदूरी करता है?
अरे…वो तो राजा है,
अपनी मर्जी का,
जो कमाया, वो अपना
खुद पर किया खर्च।
कल की फिक्र नहीं,
दिन नया, प्रयास नया,
जो मिला संतुष्ट उससे,
कल की होती परवाह नही।
रोज कुआं खोदता है,
क्योंकि हर दिन नई प्यास है।
एक साथ नही जुटाता सुविधा,
हर दिन लेता नया सुखद एहसास है।
मजदूर वो, जो आधी उम्र कमाने में दे निकाल,
बाकी आधी में हो जाए निढाल,
न आज जी पाए न कल।
उम्मीद रखता, आज से बेहतर होगा कल।
पर वो कल तो कभी आता ही नहीं।
सुख उसे मिल पाता ही नही।
सुखी वही ,जो हर रोज थोड़ा भी जी पाए।
कल पर उम्मीद न रखे,
कभी भी एक पल चुराए,
और उस पल को ऐसे जी जाए,
मानो जैसे जो है,अभी है।
अभी नहीं तो कभी नहीं।
-सोनम लड़ीवाला
जयपुर (राजस्थान)
