मुझे संपूर्ण किया है तुमने,
तुम हो बहुत महत्त्वपूर्ण,
अब कोई फरेब न रचना,
न हृदय करना चूर्ण –चूर्ण।।
मुझे…
मैं खुश भी कैसे होऊं,
जागते हुए, सपनों में कैसे खोऊं,
कहीं नज़र न मेरी ही लग जाए ,
हो जाओ न कहीं तुम फिर पराए ,
तुम बिन मैं हमेशा ही हूं अपूर्ण।
मुझे…
शब्दों की लड़ियों में,
उन यादों की कड़ियों में,
तुम ही हो अर्थपूर्ण,
मुझे तुमसे मुक्त नहीं होना,
बात हो चाहे स्वार्थपूर्ण,
मुझे …
-पूनम (कल्पना)
