मुश्किलों का दौर है, इंसान जाएगा कहाँ?
आज मजबूरी बड़ी अपनी बताएगा कहाँ?? 01।
खूबसूरत जिन्दगी बेहाल होती जा रही।
जिनकी ऑंखों है उदासी, वो छुपाएगा कहाँ?? 02।
बेवजह में टूटता ही चल रहा परिवार से?
आदमी अपने दिलों है दुख जताएगा कहाँ?? 03।
लोग सबसे दुश्मनी रख चल रहा जो आदमी?
आज जो आफत तो खुद में बचने जाएगा कहाँ?? 04।
क्रूरता हावी हुई जाती रही है आजकल।
जिन्दगी ऐसी रही तो खुशियाँ पाएगा कहाँ?? 05।
आदमी हो, आदमी बनकर ही जीना सीख ले।
जो हुए बीमार तो दुखड़ा सुनाएगा कहाँ?? 06।
-अजय पाण्डेय ‘बेबस’
