मेरे प्रिय अंतर्मन

माफ करना बहुत दिनो बाद तुमसे बात कर रही हूँ, जानती हूँ तुम मेरी प्रिय सखी हो मुझसे नाराज नहीं होगे मेरी व्यस्तता और मजबूरी को समझते हो है न।
आज मुझे तुमसे ढेर सारी बाते करनी है, मुझे यकीन है हमारी आज की ये बात-चीत तुम्हे सुकून देगी आज शिकायततें नहीं खुशियों से लबरेज बातें होंगी, पिछली सारी शिकायतों का बोझ हटा कर तुम्हें हल्का महसूस होगा, अब मैंने जीवन के कडुऐ अनभवों को निचोड़कर कडवाहट निकाल कर अलग कर दी है और उसके सार को खुशियों की मिठास मान लिया है सच जिंदगी बहुत आसान लगने लगी है।
तुम्हें पता है ,अब लोगो द्वरा उपयोग कर ठगी जाने पर मुझे मलाल नहीं होता मैं सोच लेती हूँ जो मैने किया वो मेरा फर्ज था जो उनने किया उनकी समझ।
मैं ही क्यूँ मेरे साथ ही ऐसा क्यूँ हुआ जैसे सवाल जिनके भंवर में फंस कर उलझ कर तुम्हें हलकान करती थी अब ये सब बेमानी लगते हैं तुम्हारे मजबूत सहारे से मैंने इन सब बातो विचारों और सोचों पर विजय प्राप्त कर ली है, अब छोटी-छोटी बातों पर आँखे नहीं डबडबातीं और न घबराकर इधर-उधर भागती हूँ , तुम्हारा सुदृढ़ साथ हमेशा मुझे संबल देता है, जब भी लडखडाऊँ इसी तरह संम्हाल लेना मेरा हर गम और खुशी में साथ देने के लिए शुक्रिया मेरे दोस्त।

-स्मृति गुप्ता
जबलपुर

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