यह जीवन है

यह जीवन है
बहुत नटखट है

एक पल में हंसाता
तो दूजे पल रुलाता
कभी जीवन की छांव
तो कभी धूप दिखाता

यह जीवन है
बहुत नटखट है

कभी चुपके से आकर
ढेरों खुशियां उड़ेल जाता
तो कभी ग़म के उमड़ते
सैलाबों में डुबो जाता

यह जीवन है
बहुत नटखट है

कभी इंद्रधनुषी रंगों से
कुची भर रंग भर देता
तो कभी सब कुछ छीन
कोरा कागज़ बना जाता

यह जीवन है
बहुत नटखट है

कभी मोह पाश में बांधता
तो कभी विरक्ति देता
कभी प्रेम गागर छलकाता
तो कभी राग द्वेष घृणा भर देता

यह जीवन है
बहुत नटखट है

कभी राह भटकाता
तो कभी मंजिल तक ले जाता
कभी झूठ का ताना बाना बुनता
तो कभी सच का दर्पण दिखाता

यह जीवन है
बहुत नटखट है

कभी सखा बन हाथ थामता
तो कभी शत्रु भांति व्यवहार करता
कभी हंसते हंसाते गले लगाता
तो कभी सारे सपने तार तार कर जाता

यह जीवन है
बहुत नटखट है

कभी अंधेरों में दिया जलाता
तो कभी इंजोरों में तूफान लाता
कभी स्याह रात जुगनू बन चमकता
तो कभी चांद तारों में ओझल हो जाता

यह जीवन है
बहुत नटखट है

क्या खोना है
क्या पाना है
पाकर भी सब कुछ
एक दिन सब खोना है

यह जीवन है
बहुत नटखट है

यह जीवन
एक अबूझ पहेली सी
जो बूझ गया
वह रमता जोगी बहता पानी
जो न बूझ सका
वह बिन पतवार नाव जैसी कहानी
इस जीवन की
बस इतनी सी कहानी

यह जीवन है
यही तो जीवन है……..!!

-ज्योति वत्सल

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