योग छुटकारा है दुखों का,
योग भंडारा है सुखों का।
योग मिलाता आत्मा को परमात्मा से,
परिचय कराता जीवन का श्रेष्ठता से।
योग बढ़ोतरी का नाम है,
तन-मन की शुद्धता का धाम है।
योग प्रदर्शन नहीं आवश्यकता है,
योग जीवन में आलस को भगाता है।
योग हमारी परम्परा सदियों पुरानी,
योग बिन जिंदगी लगती वीरानी।
बह रही अमृतमयी धारा योग की,
भरत भूमि ही जन्म-भूमि योग की।
हम सभी को इसका मान करना चाहिए,
प्रभात योग का हो ऐसा संकल्प करना चाहिए।
-व्यग्र पाण्डे
गंगापुर सिटी (राज.)
