सागर है रत्नों की खान,
धरा पर उसका बड़ा है मान।
सरिताएं आ -आ करके,
सिंधु का करतीं सम्मान
जलनिधि से ही तो,
नीला नभ सुंदर संसार।
समुद्र की लहर-लहर!
तट पर लेती है उछाल।
समंदर तट तो सैलानी को,
खुशियां देता है अपार।
अर्णव की सारी लहरों को,
चांद जताता नितदिन प्यार।
-सीता गुप्ता
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
