रफ़्तार ना रखो तुम तेज, मंजिल जरूर करीब होती है पर रिस्क भी तो होती है
पर रिस्क ना लो तो जिंदगी नीरस भी तो होती है,
अपनी गति से तेज हो जाये धड़कन तो, जीवन के लिए रिस्क हो सकती है
लेकिन जब तक तेज ना हो धड़कन, मोहब्बत सच्ची भी तो नहीं लगती है
खरगोश कछुए की बाजी में जीत कछुए की होती है,
अर्थात चाल धीमी भी हो, पर हो लगातार,तो भी मंजिल मिल ही जाती है,
कहते है चलने का नाम है जिंदगी थमती तो मौत है,
लेकिन पेड़ पौधे तो स्थिर है पर क्या वे मृत हैं?
उधर मुझे चटका लगा, पल के सौवे हिस्से में,इधर मेरा हाथ हटा
ईश्वर तेरा भी जवाब नहीं, क्या कमाल गति दी है तूने मुझे,
जिंदगी को आसान बना दी है मैने,
एक भेड़ की तरह, पीछे -पीछे चलने की आदत बना ली है मैने,
क्योंकि यदि बढ़ाई रफ़्तार और खो गयी तो,
-निकिता अग्रवाल
