मुस्कुराती आंखों पे शब्द बलिहारी है
माथे चमचमाती लाल बिंदिया प्यारी है,
सजाया है काजल बड़ी बड़ी आंखों में
कनखियाँ कोरों पर भी बहुत प्यारी हैं।
चौड़े माथे पे काले केश करीने सजे हैं
उतरे हों काले मेघ जैसे उजाले घने हैं,
श्रृंगार सुहाग कृष्ण से भरी मांग लाल
मोहक छवि तेरी ये राधा सुकुमारी है।
उभरे आनंदित नर्म गाल डिंपल भरे हैं
अधर गुलाबी महक सुर्ख गुलाब भरे हैं,
नग नथनी नासिका जड़ी उमंगों से भरी
रत्न सुशोभित मूरत स्वर्णों से सुनहरी है।
परिधान गुलाबी मुस्कान से भरी छवि है
मन गुलाबी वर्ण गौरांगी हृदय में रवि है,
महकते सितारों से आंचल भरा कहे दीप,
आनंदित आभा शोभित कविता प्यारी है।।
-संदीप नेमा दीप
भोपाल

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शानदार सृजन आदरणीय 👌