छुटकू को बालकनी में अपने टांगे ‘बर्ड-फीडर’ के सामने उदास खड़ा देखा तो मुकुल को आश्चर्य हुआ।
वो तो कितना खुश था जब उसने मेले से पक्षियों के लिए इस भोजन पात्र को लिया था। मम्मी ने कहा था, “राम जी की चिड़िया हैं, होगा राम जी का खेत। खाया करेंगी चिड़या भर-भर कर पेट।”
छुटकू तो मारे खुशी के ताली बजाने लगा था।
जब दाने भरकर उसे बालकनी में लगाया तो देखते ही देखते बुलबुल, गौरैया और तोते आने लगे।
लेकिन यह क्या, नन्हीं चिड़ियों का जमावड़ा देख दुष्ट बाज की नजर पड़ गई। भोली-भाली चिड़ियों की तो जान पर बन आई।
झगड़ालू कौव्वा भी चोंच मारने लगा।
पापा ने उदासी की वजह पूछी तो छोटू ने कहा, पापा! मम्मी ने तो बोला था चिड़िया राम जी की हैं और पेट भरकर खाया करेंगी। लेकिन यहाँ तो ये बदमाश बाज और कौव्वों ने कब्जा कर लिया है। वो भर भर पेट खा रहे हैं…
पापा को छोटू की मासूमियत पर हँसी आ गई। छोटू को समझाया, बेटा मम्मी ने गलत नहीं कहा था। सारी चिड़िया राम जी की ही हैं और दानों पर उन्हीं का अधिकार है। लेकिन अब कुछ शक्तिशाली चिड़ियों की फौज बन गई है और राम जी के नाम पर वो मौज कर रही है…
तो पापा क्या वो फौज चिड़ियों का पूरा दाना खा जाएगी?
नहीं बेटा। सारी चिड़ियों को संगठित होना होगाऔर दुष्ट बाज व कव्वों को मार भगाना होगा।
जब चिड़ियों में होगी एकता, दुष्ट दल रह जाएगा देखता।
छोटू के चेहरे पर फिर मुस्कान आ गई…
-मुकेश दुबे
