राहगीर.. हर कोई..जगत में,
सबको तय करनी है राहें
मंजिल मिलेगी,
किसको पहले …
वह ऊपर बैठा
ईश्वर ही जाने
कोई ,चलेगा …
तपती सड़कों से
कोई संकरी सी पगडंडी।।
किसी को..मखमली, दूब मिलेगी.
किसी को पथरीली सी पंक्ति..
गठरी जितनी,
हल्की लादोगे….
तय करनी होगी
‘आसां दूरी’
धैर्य धर
स्वानुभूति कर
सही डगर पकड़;
इस.. आभासी सी, दुनिया में
पुण्य कर्म गर कर जाओगे
बिना बोझ अपनी गठरी ले,
भवसागर से तर जाओगे,..
-लीना शर्मा
