ख्वाब भले हों ऊँचे ऊँचे पर, उन पर भी पहरे होने चाहिए।
शब्द छोटे हों मगर भाव गहरे होने चाहिए।
मिलें कभी जब अपनो से तो, मन में हुलास इक हो।
खुशियाँ आऐं जीवन में सदा ही, फसलें ऐसी बोओ।
तना तनी में टूटते रिश्ते, अपने ही उसमें हैं पिसते।
बन जाते नासूर जो घाव, जीवन भर रहते हैं रिसते।
चोट न पहुँचे किसी के दिल को, बातें ऐसी होनी चाहिए।
शब्द छोटे हों मगर भाव गहरे होने चाहिए।
-स्मृति गुप्ता
जबलपुर
