शिकायतों में संबंध

लेखक महोदय आज बैंक गए थे कुछ काम से । कांउन्‍टर पर पहुंचे तो कर्मचारी ने बताया कि स्‍टाफ कम है यह काम आज यहॉं नहीं हो पाएगा, आप चाहो तो मोबाईल में एप डाउनलोड करके उसमें अपने लेनदेन देख लिया करें । लेखक ने कहा कि बैंकिंग लेनदेन के काम मुझे मोबाईल पर उपयुक्‍त नहीं लगते । समाधान न होने पर लेखक शिकायत लेकर बैंक मैनेजर के कक्ष में पहुँचे और अपना परिचय बताया कि पास के ही विभाग में मैं सेवारत हूँ और लम्‍बे समय से आपका ग्राहक हूँ, किन्‍तु इस प्रकार की समस्‍या आपकी शाखा में लम्‍बे समय से बनी हुई है । बैंक मैनेजर ने भी पहले तो समस्‍या ही बताई किन्‍तु उसके समाधान का रास्‍ता खोजा गया ।
संयोगवश बैंक मैनेजर के कक्ष में उसी बैंक के महाप्रबंधक भी बैठे हुए थे । अवसर अनुकूल बातचीत के आदान-प्रदान में लेखक ने बताया कि वे राजभाषा से जुड़े हुए हैं, महाप्रबंधक एवं मैनेजर साहब ने कहा कि वे भी राजभाषा के कार्यों से जुड़े हुए हैं । इस बीच जलपान की व्‍यवस्‍था की गई। भरी दोपहरी में एसी कक्ष में कॉफी की महकती खुशबू और चुस्कियों के चाव के साथ लेखक ने बताया कि उनकी लिखी पुस्‍तक का विगत दिवस भव्‍य लोकार्पण हुआ है, जो कि ऑनलाईन उपलब्‍ध है । महाप्रबंधक महोदय की बांछें खिल गईं बोले वाह भाई वाह, चलिए कोई कविता या कुछ लाइनें सुना दीजिए लेखक ने हौसले शीर्षक की कविता सुनाई और उम्‍मीदों का आसमान खुल गया । महाप्रबंधक बोले पुस्‍तक तो खरीदना ही पड़ेगी किन्‍तु लेखक ने कहा सौभाग्‍यवश पुस्‍तक उनके बेग में है और वे उनकी काव्‍य रूचि के लिए सप्रेम देना चाहते हैं । लेखक ने काव्‍य संग्रह जैसे ही उनको दिया महाप्रबंधक बोले इसका मूल्‍य देना जरूरी है तभी तो साहित्‍य सार्थक है, लेखक ने पुरजोर मना किया किन्‍तु अनुभवी महाप्रबंधक के अनुनय-विनय के आगे एक न चली और इस स्‍वर्णिम आनंद के क्षण को कैमरे में केद किया गया ।
कथा में अनुपम यह है कि महाप्रबंधक और पुस्‍तक प्रकाशक का नाम राजीव है साथ ही लेखक एवं मैनेजर का नाम संदीप है । सार स्‍पष्‍ट है कि शिकायतें समाधान के साथ ही संबंध के तार भी जोड़ती है्ं । यही तो मनसुख है ।

-संदीप नेमा’दीप’
भोपाल

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